रविवार, 23 सितंबर 2012






बचेंगे तो सहर देखेंगे
कमलेश
भारत बंद के ठीक अगले दिन हमलोग कुछ खुदरा व्यवसायियों और कुछ लघु उद्यमियों से मिलने पहुंचे थे। हम जानना चाहते थे कि खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लेकर वे क्या सोचते हैं जो इससे सीधे प्रभावित होने वाले हैं। दलदली रोड, बीएमपी रोड और बोरिंग रोड के कुछ इलाके खुदरा व्यापार के बड़े इलाके हैं। खासकर दलदली में खुदरा दुकानों से खरीदारी करने के लिए पूरे पटना से लोग आते हैं।
खुदरा व्यवसायी इस मामले में बहुत आंकड़ेबाजी के बारे में नहीं जानते। कुछ लोगों ने तो वालमार्ट का नाम भी पहली बार सुना है। हालांकि अधिकतर दुकानदारों ने कहा कि इसके खिलाफ हुए बंद में वे पूरी तरह शामिल थे और उन्होंने खुद अपनी दुकानों को बंद रखा था।
 खुदरा व्यवसायियों के नेता हैं रमेश चंद्र तलरेजा। बिल्कुल पारंपरिक अंदाज में धोती-कुरता पहनने वाले तलरेजा देखने से ही खुदरा व्यापारी के प्रतिरूप लगते हैं। एफडीआई को लेकर उनकी जानकारी अद्भुत थी और उन्होंने बिल्कुल जमीनी अंदाज में समझाया कि एफडीआई का असर उनके व्यवसाय पर किस तरह पड़ेगा। उनसे बात शुरू हुई तो वे पहले हंसे और फिर धीरे से कहा- वाल मार्ट तो अभी दूर है। संकट तो अभी से शुरू हो गया है। खुदरा दुकानदारों की रोजी-रोटी पर तो अभी से ही बिजली गिरने लगी है। आज की तारीख में हमारे 15 फीसदी ग्राहक हमसे अलग हो गए हैं। हमारे ये ग्राहक ऐसे थे जो नकद ग्राहक थे और जिनके यहां से उधार की कोई गुंजाइश नहीं थी।
हमारे नहीं समझने पर तलरेजाजी ने समझाने वाले अंदाज में कहा- हाल के दिनों में पटना में खरीदारी की सूरत पूरी तरह बदल गई है। पटना में इधर के दिनों में तेजी से खुल रहे मेगा मार्ट और मॉल ने हमारे धंधे को चौपट करने की शुरूआत कर दी है। उनके अनुसार पटना में खुदरा दुकानदारों की ये स्थिति तब हुई है जब शहर में केवल एक मॉल है। अभी दो-तीन मॉल खुलने वाले हैं। इनके खुलने के बाद तो और हालत खराब हो जाएगी। इसके बाद हम वॉलमार्ट से लड़ने लायक बचेंगे तब तो लड़ेंगे।
उनके अलावा पटना के दूसरे इलाकों के भी कई अन्य खुदरा व्यापारियों से बात करने के बाद जो तस्वीर उभरती है वह सचमुच भयावह है। यह इस बात को भी बताता है कि हम किस तरह छोटे और मंझोले दुकानदारों को उनके भाग्य पर छोड़ते जा रहे हैं। छोटे और मंझोले खुदरा व्यपारी अमूमन अपने ग्राहकों को तीन श्रेणी में बांटते हैं। पहली श्रेणी में वैसे ग्राहक होते हैं जो पूरी खरीदारी हर महीने में एक साथ और नकद करते हैं। ये ग्राहक महीने में एक दिन आते हैं और एक साथ पूरे महीने की खरीदारी कर लेते हैं। ऐसे ग्राहक इन छोटे दुकानों की जान होते हैं क्योंकि इनसे उन्हें एकमुश्त पैसा मिल जाता है। दुकानदारों की भाषा में ये बड़े लोग होते हैं। दूसरी श्रेणी में वैसे ग्राहक होते हैं जिनके साथ उधार खाते का हिसाब चलता है। ये ग्राहक भी खरीदारी तो खुद महीने में एक बार करते हैं लेकिन इनके यहां से पैसा रुक-रुक कर आता है। तीसरी श्रेणी में पूरे महीने छोटी-मोटी खरीदारी करने वाले लोग होते हैं। इनके साथ भी उधार-खाते का संबंध निरंतर चलता है। दुकानदारों के अनुसार तीसरी श्रेणी के लोगों के भरोसे धंधा नहीं चल सकता है।
राजधानी में पहले विशाल मेगामार्ट खुला और उसके बाद पीएनएम मॉल। खासकर मॉल खुलने के बाद खुदरा व्यापारियों ने पाया कि उनके यहां पहली श्रेणी के खरीदारों का आना कम हो रहा है। अब तो धीरे-धीरे पूरी तरह बंद हो गया है। दरअसल अब इन खरीदारों को मॉल और मेगा मार्ट में खरीदारी के साथ-साथ घूमने-फिरने की भी जगह मिल गई है। ये अपने परिवार के साथ मॉल जाते हैं, मौज-मस्ती करते हैं और सामान खरीदकर वापस आ जाते हैं। अब दलदली रोड जैसे जगहों की दुकानें उनके लिए दूसरी प्राथमिकता की दुकान रह गई हैं। मतलब इन दुकानों में वे बीच-बीच में उस समय चले जाते हैं जब उन्हें अचानक किसी खास चीज की जरूरत पड़ जाती है और वे उस एकमात्र चीज के लिए मॉल नहीं जा सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी के घर में बीच महीने में अचानक घी खत्म हो जाती है तो वह जरूर इन छोटी दुकानों में जाता है। अलबत्ता दूसरी और तीसरी श्रेणी के दुकानदार अभी भी पूरी तरह ऐसी ही दुकानों के साथ हैं।
अभी केवल पाटलिपुत्र कॉलोनी में ही मॉल होने का लाभ भी इन छोटी दुकानों को मिल जा रहा है। दूरी वाले इलाकों के लोग सप्ताह में एक दिन या कम से कम महीने में एक दिन मॉल जा रहे हैं लेकिन जब राजापुर पुल और स्टेशन के आसपास के इलाकों में बन रहे मॉल खुल जाएंगे जिनके खुलने की बात चल रही है तो फिर इन छोटी दुकानों का क्या होगा? ये सोचकर ही ये दुकानदार डर जा रहे हैं। खुद तलरेजाजी ने सलाह दी कि हमें पीएनएम मॉल के आसपास के इलाकों में पहले से चलने वाली छोटी दुकानों का सर्वे करना चाहिए और देखना चाहिए कि मॉल खुलने के बाद उनकी बिक्री पर कितना असर पड़ा है। मॉल और मेगा मार्ट के अलावा नाइन टू नाइन और दूसरे बड़े शॅपिंग स्टोरों ने उनकी हालत खराब कर दी है। दुकानदारों को तो अब यह डर भी सता रहा है कि जब मॉल की संख्या ज्यादा हो जाएगी तो दूसरी श्रेणी के भी ग्राहक उनके पास से हटने लगेंगे। और तब उनके पास केवल ऐसे ग्राहक ही बचेंगे जो छोटी-छोटी खरीदारी करेंगे और इसका भी अधिकतर हिस्सा उधार खरीदारी का रहेंगा।
ये पटना के विकास का नया चेहरा है। यहां डॉमिनोज खुला, नेरुलाज खुलने जा रहा है और अब केएफसी की बात हो रही है। इनकी खूब चर्चा हो रही है। लेकिन जिन इलाकों में ये खुल रहे हैं उन इलाकों में छोटी-मोटी चाय-नाश्ते की दुकानें बंद होती जा रही हैं। ये बेरोजगार हो रहे लोग अभी क्या कर रहे हैं- ये जानना भी दिलचस्प होगा। 

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